Tuesday, January 1, 2019

2019 में स्मार्टफोन की बिक्री 12% बढ़ेगी, 15 से 30 हजार रुपए तक के फोन 20% ज्यादा बिकेंगे

2018 में स्मार्टफोन की बिक्री 11% बढ़ी। इस साल देश में 15 करोड़ स्मार्टफोन बिके। 2019 में इनकी बिक्री 12% बढ़ने की संभावना है। नए फीचर वाले फोन के दाम ज्यादा होने के बावजूद इनकी डिमांड बढ़ेगी। हालांकि कुल बिक्री संख्या एंट्री लेवल और अफोर्डेबल फोन के चलते ही बढ़ेगी। फरवरी से ई-कॉमर्स के नए नियम लागू होने के बाद फ्लिपकार्ट और अमेजन जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर एक्सक्लूसिव लॉन्च और डीप डिस्काउंट जैसे ऑफर नहीं दिखेंगे।

अब लोग महंगे फोन खरीद रहे हैं: काउंटरप्वॉइंट
काउंटरप्वॉइंट रिसर्च के एसोसिएट डायरेक्टर अरुण पाठक के अनुसार सस्ते फोन के कारण अमेरिका को पीछे छोड़कर भारत दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन मार्केट बना है। लेकिन यह ट्रेंड तेजी से बदलने वाला है। 15,000 से 30,000 रुपए तक के फोन की बिक्री इस साल 20% बढ़ने की उम्मीद है। 5 साल में इनकी बिक्री 4 गुना बढ़ सकती है।

उन्होंने बताया कि अभी तक 10,000 रुपए से कम के फोन ही ज्यादा बिकते थे। लेकिन नए ट्रेंड में लोग महंगे फोन की तरफ जा रहे हैं। एक समय बेहतर फीचर वाले फोन ज्यादातर इंपोर्टेड ही होते थे। इसलिए उनकी कीमत भी ज्यादा होती थी। लेकिन इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाए जाने के बाद कंपनियां भारत में ही फोन बनाने लगी हैं।

मोबाइल मैनुफैक्चरिंग की 268 यूनिट लगीं
इंडिया सेलुलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन के अनुसार 2018-19 में 1.65 लाख करोड़ रुपए के 29 करोड़ फोन बनने की उम्मीद है। एसोसिएशन के चेयरमैन पंकज महेंद्रू का मानना है कि भारत में मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग शुरू होने से करीब 3 लाख करोड़ रुपए की बचत हुई है। 

उन्होंने बताया कि हैंडसेट और कंपोनेंट बनाने वाली 268 इकाइयां अब तक लग चुकी हैं। इनमें 6.7 लाख लोगों को रोजगार मिला है। एसोसिएशन और मैकेंजी की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में 2025 तक 125 करोड़ हैंडसेट बनाने की क्षमता विकसित हो सकती है।

नासा ब्रह्मांड की सभी ज्ञात सीमाओं के पार
नासा का अंतरिक्षयान ‘न्यू होराइजन्स’ ब्रह्मांड की अभी तक ज्ञात सभी सीमाओं को लांघते हुए अल्टिमा थुले (ब्रह्मांड की सीमाओं से आगे का स्थान) के लिए निकल जाएगा। वहां जाकर ये यान इस बात की जानकारी जुटाएगा कि धरती के वायुमंडल का निर्माण कैसे हुआ है।

ऑटोमेटेड सिग्नल से ट्रैफिक सिग्नल सुधारने में चीन आगे

अलीबाबा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ‘सिटी ब्रेन’ पर काम कर रही है। इसके लिए चीन की सड़कों पर हजारों कैमरे लगाए गए हैं। इनसे ट्रैफिक लाइट से लेकर एक्सीडेंट तक के डेटा इकट्‌ठा किए जा रहे हैं। इसके आधार पर ट्रैफिक में सुधार किया जा रहा है। पायलट प्रोजेक्ट में ऑटोमेटेड सिग्नल से गाड़ियों की औसत स्पीड 15% बढ़ गई। ट्रैवल टाइम भी औसतन 3 मिनट कम हो गया। इमरजेंसी में एंबुलेंस के पहुंचने का समय 50% घट गया। ये व्यवस्था इस साल से स्थायी हो जाएगी।

तेल और गैस जैसे जोखिम वाले सेक्टर के कर्मचारी ऑगमेंटेड रियलिटी और वर्चुअल रियलिटी का इस्तेमाल शुरू करेंगे। कई देशों में कर्मचारियों को इसकी ट्रेनिंग भी दी जा रही है। 2019 से ये व्यवस्था सुचारु रूप से चलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि 2022 तक इसका बाजार 42 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है। भारत में भी इसको लेकर रिसर्च जोरशोर से जारी है।

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